Tuesday, December 16, 2008

khamoshiyaan...

कुछ पलों के बाद, उस बरसों की खामोशी को उसी ने तोड़ा पता नही क्या बोला उसने , लेकिन वो बोली थी, ताकि वो खामोशी खत्म हो जाए, जो उसको जाने क्यूँ इतना डरा रही था वो ऐसे चुपचाप था, जैसे कभी बोलेगा ही नही की जैसे कुछ सोच कर चुप रहना ही बेहतर समझा उसने

अपने हाथों में उसका हाथ लेकर, उसकी आंखों में देखा उसनेपर आज नज़रें तक खामोश थी। "नाराज़ हो?" उसने डरते हुए पूछा, मानो जवाब से घबरा रही हो। वो हलके से मुस्कुराया, उसके हाथों से अपना हाथ छुड़ाकर उसके चेहरे को बहुत ही प्यार से थपथपाया।

"ऐसा क्यूँ लगा तुम्हे?"
"तुम कुछ बोलते ही नही."
"ज़रूरी है, की कुछ बोलूं" कहकर उसकी आंखों में एक शरारत सी चमक उठी, जिसकी रोशनी में एकाएक सब अच्छा सा लगने लगा, हर डर मानो कहीं खो गया।

12 comments:

oo7 said...

kabhi kabhi kuch kahe bina hi bahut kuch kaha jaa sakta hai..but har koi nai samajhta.

marvin the paranoid android said...

nice...

KIRAN said...

hey....i like dis....sweeeet hai!

rain girl said...

@007... wahi to baat hai, har ko nahi samajhta..

rain girl said...

@marvin..acha?

rain girl said...

@Kiran.. *hugs* welcome here..

Beauty and the BEast said...

awwww... pretty!! And exactly what I needed :)

manoj dwivedi said...

beutiful emotion in the evening...

Prakhar said...

brillianto!...short nd sweet!

rain girl said...

@B&B...am glad i fulfilled someone's need..

rain girl said...

@manoj dwivedi..thank you!

rain girl said...

@Prakhar... thank you so much.. :)